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KRANTI KALA SANGAMक्रान्ति कला संगम मुरैना मध्‍यप्रदेश आपका हार्दिक स्‍वागत करती है शासकीय मान्‍यता एवं अनुदान प्राप्‍त स्‍वयंसेवी संस्‍था

 

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क्रान्ति कला संगम मुरैना मध्‍यप्रदेश

संस्‍था की नियमावली

 1.      संस्था का नाम         :-     क्रांति कला संगम मुरैना (म.प्र.) होगा ।

2.     संस्था का कार्यालय      :-    

                             मकान नंबर 52/2 नई जमीन, श्याम बिहार,

                             एस.एस.एफ. लाईन, बटालियन रोड, मुरैना

                             तहसील व जिला मुरैना (म.प्र.) में स्थित होगा।

3.     संस्था का कार्यक्षेत्र       :-    सम्‍पूर्ण मध्‍यप्रदेश

4.     संस्था के उद्देश्य निम्नांकित होंगे :-

       1.      साहित्य, कला, विज्ञान, एवं ललित कलाओं की अभिवृद्धि करना । तथा राष्ट्रीय एकता की भावना पैदा करने के प्रयास करना ।

       2.     भारतीय संस्कृति, साहित्य को नाटय कला के माध्यम से श्रेष्ठ बनाते हुए उत्कृष्ठ कार्य करना । एवं कृषि विकास, वृक्षारोपण आदि कार्य ।

       3.     नाटय कला साहित्य, विज्ञान, एवं अन्य कलाओं की अभिवृद्धि करते हुये शैक्षणिक शालाओं व सस्थाओं की स्थापना कर राष्ट्र के लिये बालक / बालिकाओं को उत्तम नागरिक बनाना । तथा खेल कूद की गतिवधि व खेलकूद के कार्यक्रम आयोजित करना। खेल विकास के क्षेत्र में कार्य करना प्रौढ़ शिक्षा के कार्यक्रम संचालित करना ।

       4.     उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति करते हुये रूढियों से निकल कर प्रगतिशील विचारों को अपनाते हुए, राष्ट्रीय एकता अखण्डता के लिये धार्मिक सद्भाव एवं सामाजिक उत्थान की योजनाओं का क्रियान्वयन करना ।

       5.     सभी जाति वर्ग की शहरी, ग्रामीण, निर्धन, बेसहारा, परित्यक्ता, विधवा, विपत्तिग्रस्त, व कामकाजी महिलाओं के उत्थान एवं उनके सर्वांगीण विकास की योजना संचालित कर , उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगारोन्मुखी बनाकर उन्हें स्थापित करना ।

       6.     महिला उत्पीड़न के क्षेत्र मेंं उन्नत कार्य करते हुये पीड़ित महिलाओं की मदद करना। उन्हें कानूनी सहायता व सलाह नि:शुल्क प्रदान । तथा उनके सर्वांगीण विकास की योजनाओं को संचालित कर उन्हें लाभान्वित करने के प्रयास करना ।

       7.     विकलांग पुरूषों/महिलाओं , बच्चों एवं युवतियों के कल्याण की योजनाओं व कार्यक्रमों का संचालन करना । उनके शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति के लिये उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना ।

       8.     राष्ट्रीय विकास  एवं समाज कल्याण के हित में पुरूषों/महिलाओं एवं युवक/युवतियों तथा शिक्षित बेरोजगार युवक/युवतियों के कल्याण एवं उत्थान   की योजनाओं का संचालन कर उन्हें तकनीकी व्यावसायिक एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान कर कार्यक्रमों का संचालन करना । पर्यावरण-संरक्षण, परिवार कल्याण कार्यक्रम नि:शुल्क टीकाकरण, एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का संचालन करना।

       9.     शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर शैक्षणिक गतिविधियों एवं कार्यक्रमों का संचालन करना, प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम, औपचारिक शिक्षा केन्द्र चलाना हिन्दी, उर्दू, अरबी, मदरसों एवं स्कूलों की स्थापना कर, अल्पसंख्यकों का शैक्षणिक विकास करना एवं शिक्षित निर्धन एवं  गरीब महिलाओ के लिये सौंदर्य प्रशि. केन्द्र खोलना ।

       10.    नशा मुक्ति कार्यक्रम संचालित करना तथा राष्ट्रीय- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार के शिविर लगाकर महिला एवं पुरूषों को जागरूक करना ।

       11.     अनु. जाति एवं जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए परीक्षा पूर्व प्रशि. कार्यक्रम चलाना, तकनीकि एवं व्यावसायिक पाठयक्रम के तहत स्कूल एवं कॉलेज खोलना।

(5)    सदस्यता :-

              संस्था के निम्नलिखित श्रेणी के सदस्य होंगे :-

       (अ)    संरक्षण सदस्य :-

              संस्था को जो व्यक्ति दान के रूप में रूपये 1100.00 या अधिक एक मुश्त या एक साल में 12 किश्तों में देगा वह समिति का संरक्षक सदस्य होगा ।

       (ब)    आजीवन सदस्य:-

              जो व्यक्ति संस्था को दान के रूप में रूपये 500.00 या अधिक देकर, आजीवन सदस्य बन सकेगा । कोई भी आजीवन सदस्य रूपये 500.00 या अधिक देकर संरक्षक सदस्य बन सकता है ।

       (स)    साधारण सदस्य :-

              जो व्यक्ति रूपये 11.00 प्रतिमाह रूपये 132.00 प्रति वर्ष संस्था को चन्दे के रूप में देगा, वह साधारण सदस्य होगा । साधारण सदस्य केवल उसी अवधि के लिये सदस्य होगा जिसके लिये उसने चंदा दिया है । जो साधारण सदस्य, बिना सन्तोषजनक कारणों से छ: माह तक देय चन्दा नहीं देगा उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी । ऐसे सदस्य द्वारा संस्था के लिये नया आवेदन-पत्र देने तथा बकाया चन्दे की राशि पर पुन: सदस्य बनाया जा सकता है ।

       (द)    सम्माननीय सदस्य :-

              संस्था की प्रबंधकारिणी किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को उस समय के लिये जो भी वह उचित समझे, सम्मानीय सदस्य बना सकती है । ऐसे सदस्य साधारण सभा की बैठक में भाग ले सकते हैं । परन्तु उनको मत देने का अधिकार नहीं होगा ।

(6)    सदस्‍यता की प्राप्ति :-

              प्रत्येक व्यक्ति जो कि समिति का सदस्य बनने का इच्छुक हो उसे लिखित रूप में आवेदन-पत्र प्रस्तुत करना होगा । ऐसा आवेदन-पत्र प्रबंधकारिणी समिति को पेश होगा जिसके आवेदन-पत्र को स्वीकार करने या, आमान्य करने का अधिकार, होगा।

(7)    सदस्यों की योग्यता :-

संस्था का सदस्य बनने के लिए किसी भी व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यता का होना आवश्यक है  । 

       1.      आयु 18 वर्ष से कम न हो ।

       2.     शारीरिक स्वस्थ्य हो ।

       3.     समिति के नियमों के पालन की प्रतिज्ञा की हो ।

       4.     सद्चरित्र हो तथा मद्यपान न करता हो ।

(8)    सदस्यता की समाप्ती :-

              संस्था की सदस्यता निम्नलिखित स्थिति में समाप्त हो जायेगी :-

       1.      मृत्यु हो जाने पर ।

       2.     पागल हो जाने पर ।

       3.     संस्था को देय चन्दे की रकम नियम 5 में बताये अनुसार जमा न करने पर ।

       4.     त्याग-पत्र देने पर, और वह स्वीकार होने पर ।

       5.     चारित्रिक दोष होने पर, और कार्यकारिणी समिति के निर्णय अनुसार निकाल दिए जाने पर । जिसके निर्णय पारित होने की सूचना सदस्य तक को लिखित रूप में देनी होगी ।

(9)    संस्था के कार्यालय में सदस्य पंजी रखी जावेगी जिसमें निम्न ब्यौरे दर्ज किये जायेंगे:-

       1.      प्रत्येक सदस्य का नाम तथा व्यवसाय व पता ।

       2.     वह तारीख जिसको सदस्य को प्रवेश दिया गया हो ,व रसीद नम्बर ।

       3.     वह तारीख जिसमें सदस्यता समाप्त हुई हो ।

(10)                 '' साधारण -सभा :-

              साधारण सभा में नियम 5 में दर्शाई गई श्रेणी के सदस्य समावेशित होंगे । साधारण सभा की बैठक आवश्यकता अनुसार हुआ करेगी, परन्तु वर्ष में बैठक एक बार अवश्य हुआ करेगी । बैठक का माह, तथा बैठक का स्थान व समय कार्य-कारिणी समिति निश्चित कर 15 दिन पूर्व सूचना प्रत्येक सदस्य को दी जावेगी । बैठक का कोरम 3/5 सदस्यों का होगा । संस्था की प्रथम आम-सभा पंजीयन दिनांक तीन माह के भीतर बुलाई जावेगी । उसमें संस्था के पदाधिकारियों का विधिवत निर्वाचन किया जावेगा। यदि संबंधित आम-सभा का आयोजन किसी भी समय नहीं किया जाता हो पंजीयक को अधिकार होगा कि वह संस्था की आम-सभा का आयोजन किसी जिम्मेदार कर्मचारी के मार्गदर्शन में एवं पदाधिकारियों का विधिवत चुनाव कराया जायेगा । 

         (ब)    प्रबंधकारिणी सभा :-

                     प्रबंधकारिणी सभा बैठक प्रत्येक माह होगी तथा बैठक का एजेण्डा तथा सूचना बैठक दिनांक से सात दिन पूर्व कार्यकारिणी के प्रत्येक सदस्य को भेजी जाना आवश्यक होगी। बैठक में कोरम 1/2 सदस्यों का होगा। यदि बैठक का कोरम पूर्ण नहीं होता है तो बैठक एक घण्टे के लिये स्थगित की जाकर उसी स्थान पर उसी दिन पुन: की जा सकेगी जिसके लिये कोरम की कोई शर्त न होगी।

         (स)    विशेष :-

              यदि कम से कम कुल संख्‍या (कुल सदस्योंं की संख्या का) के 2/3 सदस्यों द्वारा लिखित रूप से बैठक बुलाने हेतु आवेदन करें तो उनके दर्शाये विषय पर विचार करने के लिये साधारण सभा की बैठक बुलाई जावेगी विशेष संकल्प पारित हो जाने पर संकल्प की प्रति बैठक पंजीयक को संकल्प पारित हो जाने के दिनांक से 14 दिन के भीतर भेजा जावेगा। पंजीयक का इस सबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने तथा समिति को परामर्श देने का अधिकार होगा।

       (11)    साधारण सभा के अधिकार :-

                  साधारण सभा के अधिकार व कर्तव्‍य निम्‍नवत होंगे :-

              (1)     संस्था के पिछले वर्ष का वार्षिक विवरण प्रगति प्रतिवेदन स्वीकृत करना।

              (2)    संस्था को स्थाई निधि व संपत्ति की ठीक व्यवस्था करना।

              (3)    आगामी वर्ष के लिये लेखा परीक्षकों की नियुक्ति करना।

              (4)    अन्य ऐसे विषयों पर विचार करना जो प्रबंधकारिणी द्वारा प्रस्तुत हो।

              (5)    संस्था द्वारा संचालित संस्थाओं के आय-व्यय पत्रकों को स्वीकृत करना।

              (6)    बजट का अनुमोदन करना।

       (12)    प्रबंधकारिणी का गठन :-

           ट्रस्‍टीज अगर कोई हो तो समिति के पदेन सदस्‍य होंगे । नियम 5  (,,,) में दशाये गये सदस्यों जिनके नाम पंजी रजिस्टर में दर्ज हो बैठक में बहुमत के आधार पर निम्‍नलिखत पदाधिकारियों तथा प्रबंधकारिणी समिति के सदस्यों का निर्वाचन होगा।

       (13)    प्रबंधकारिणी समिति का कार्यकाल :-

              प्रबंध कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन वर्ष होगा समिति का यथेष्टाकरण होने पर उस समय  जब तक कि नई प्रबंध कारिणी समिति का निर्माण नियमानुसार या अन्य कारणों से नहीं हो जाता करती रहेगी। किन्तु अवधि 6 माह से अधिक नहीं होगी जिसका अनुमोदन  साधारण सभा से कराना अनिवार्य होगा।

       (14)    प्रबंधकारिणी के अधिकार व कर्तव्य :-

              (अ)    जिन उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु समिति का गठन  है उसकी पूर्ति करना और इस आशय की पूर्ति हेतु व्यवस्था करना।

              (ब)    पिछले वर्ष का लेखा पूर्णत: परीक्षित किया हुआ प्रगति प्रतिवेदन के          

                  साथ प्रतिवर्ष साधारण सभा की बैठक में प्रस्तुत करना।

              (स)    समिति एवं उसके अधीन संचालित संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन        

                  तथा भत्तों आदि का भुगतान करना। संस्था की चल अचल सम्पत्ति पर

                  लगने वाले कर आदि का भुगतान करना।

              (द)    कर्मचारियों, शिक्षकों आदि की नियुक्ति करना।

              (इ)    अन्य आवश्यक कार्य करना, जो साधारण सभा द्वारा समय-समय पर    

                  सौंपे जाये।

              (च)    संस्था की समस्त चल अचल सम्‍पत्ति, कार्यकारिणी समिति के नाम से         

                  रहेगी।

              (छ)    संस्था द्वारा कोई भी स्थावर सम्पति, रजिस्ट्रार की लिखित अनुज्ञा के

                  बिना विक्रय द्वारा या अन्यथा अर्जित या आन्तरिक नहीं की जाऐगी।

              (ज)    विशेष बैठक आमंत्रित कर संस्था के विधान में संशोधन किये जाने के

                  प्रस्ताव पर विचार विमर्श कर साधारण सभा की विशेष बैठक में उसकी

                  स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करेगी। साधारण सभा की विशेष बैठक में उसकी

                  स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करेगी। साधारण सभा में कुल सदस्यों 2/3 मत  

                  से संशोधित पारित होने पर उक्त प्रस्ताव पारित कर पंजीयक को

                  अनुमोदन हेतु भेजा जावेगा।

       (15)    अध्यक्ष के अधिकार :-

       अध्यक्ष साधारण सभा तथा प्रबंधकारिणी समिति की समस्त बैठकों की अध्यक्षता करेगा तथा मंत्री द्वारा साधारण सभा में प्रबंधकारिणी की बैठकों का आयोजन करवायेगा। अध्यक्ष का मत विचारार्थ विषयों में निर्णयात्मक होगा।

       (16)    उपाध्यक्ष के अधिकार :-

              अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा साधारण सभा एवं प्रबंधकारिणी की, समस्त बैठकों की अध्यक्षता करेगा। अध्यक्ष के समस्तअधिकारों का उपयोग करेगा।

       (17)    सचिव (मंत्री) के अधिकार :-

              (1)     साधारण सभा एवं प्रबंधकारिणी की बैठक समय-समय पर बुलाना और

                  समस्त आवेदन पत्र तथा सुझाव जो प्राप्त हो प्रस्तुत करना।

              (2)    समिति का आय-व्यय का लेखा परीक्षण से प्रतिवेदन तैयार करके

                  साधारण सभा के समुख्य प्रस्तुत करना।

              (3)    समिति के सारे कागजातों को तैयार करना तथा कराना । उनका

                  निरीक्षण करना व अनियमितता पाये जाने पर उसकी सूचना

                  प्रबंधकारिणी को देना।

              (4)    सचिव को किसी कार्य के लिये एक समय में रूपये 2000/- खर्च

                  करने का अधिकार होगा।

(5)             मंत्री (सचिव) को कर्मचारियों की सी. आर. वेतन काटना एवं निरीक्षण

       संबंधी पूर्ण अधिकार होंगे ।

     (18) संयुक्‍त सचिव के अधिकार :-

        सचिव की अनुपस्थिती में संयुक्‍त सचिव (मंत्री) सचिव के समस्‍त अधिकारों का

        उपयोग करेगा ।

       (19) कोषाध्यक्ष के अधिकार :-

              समिति की धनराशि का पूर्ण हिसाब रखना तथा सचिव एवं कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत व्यय करना। राशि आहरण एवं वितरण की स्‍वीकृति सचिव या कार्यकारिणी से प्राप्‍त करना अनिवार्य होगा ।

       (20)   बैंक खाता :-

              संस्था की समस्त निधि किसी अनुसूचित बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा रहेगी। धन का  आहरण अध्यक्ष, या मंत्री (सचिव) एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों से होगा। दैनिक व्यय हेतु कोषाध्यक्ष के पास अधिकतम 2000 रूपये रहेगे।

       (21) पंजीयक को भेजे जाने वाली जानकारी :-

              अधिनियम की धारा 27 के अन्तर्गत संस्था की वार्षिक आमसभा होने के दिनांक से 14 दिन के भीतर निर्धारित प्रारूप पर कार्यकारिणी समिति की सूची फाईल की जावेगी तथा धारा 28 के अंतर्गत संस्था की परीक्षित लेखा भेजेगी।

       (22)   संशोधन :-

              संस्था के विधान में संशोधन साधारण सभा की बैठक में कुल सदस्यों के 2/3 मतों से पारित होगा। यदि आवश्यक हुआ तो संस्था के हित में उसके स्‍वीकृत विधान में संशोधन करने के अधिकार पंजीयक फर्म्स एवं संस्थायें को होगा जो प्रत्येक सदस्य को मान्य होगा।

       (23)   विघटन :-

              संस्था का विघटन साधारण सभा में कुल सदस्यों के 3/5 मत से पारित किया जावेगा। विघटन के पश्चात् संस्था की चल तथा अचल सम्पत्ति किसी समान उद्देश्यों वाली संस्था को सोपी दी जावेगी। उक्त समस्त कार्यवाही अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार की जावेगी।

       (24)   सम्पत्ति :-

              संस्था की समस्त चल तथा अचल सम्पत्ति संस्था के नाम से रहेगी। संस्था की अचल सम्पत्ति (स्थावर) रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाये की लिखित अनुज्ञा के बिना विक्रय द्वारा, दान द्वारा या अन्यथा प्रकार से अर्जित या अन्तरित नहीं की जा सकेगी।

       (25)   बैंक खाता :-

              संस्था की समस्त निधि किसी अनुसूचित बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोला जावेगा। एवं समय-समय पर धन जमा करने व निकालने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

       (26)   पंजीयक द्वारा बैठक बुलाना :-

              संस्था की पंजीयन नियमावली के अनुसार पदाधिकारियों द्वारा वार्षिक बैठक न बुलाए जाने पर या अन्य प्रकार से आवश्यक होने पर पंजीयक फर्म्स एंव संस्थायें को बैठक बुलाने का अधिकार होगा। साथ ही यह बैठक में विचारार्थ विषय निश्चित कर सकेगा।

       (27)   विवाद :-

              संस्था में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न होने पर अध्यक्ष को साधारण सभा की अनुमति से सुलझाने का अधिकार होगा। यदि इस निश्चित या निर्णयों से पक्षों को सन्तोष न हो तो वह रजिस्ट्रार की ओर विवाद के निर्णय के लिये भेज सकेंगें । रजिस्ट्रार का निर्णय अन्तिम व सर्व मान्य होगा। संचालित सभाओं के विवाद अथवा प्रबंध समिति के विवाद उत्पन्न होने पर अन्तिम निर्णय देने का अधिकार रजिस्ट्रार को होगा।

 

सत्‍यप्रतिलिपि फर्म्‍स एवं संस्‍थाऐं                               हस्‍ताक्षर पदाधिकारीगण

ग्‍वालियर चंबल डिवीजन ग्‍वालियर म.प्र.

दिनांकित 02/04/1998 


क्रान्ति कला संगम मुरैना मध्‍यप्रदेश

संस्‍था का ज्ञापन पत्र

प्रारूप क्रमांक -1

समितियों के पंजीय हेतु ज्ञापन पत्र

(देखिये नियम 3)

 

1.      संस्था का नाम         :-    क्रांति कला संगम मुरैना (म.प्र.)

2.     संस्था का कार्यालय      :-    मकान नंबर 52/2 नई जमीन, श्याम बिहार,

                             एस.एस.एफ. लाइन, बटालियन रोड, मुरैना

                             तहसील व जिला मुरैना (म.प्र.) में स्थित होगा।

3.     संस्था का कार्यक्षेत्र       :-    ग्वालियर-चंबल संभाग (म.प्र.)

टीप :- संस्‍था का कार्यक्षेत्र वर्तमान में संशोधित होकर सम्‍पूर्ण मध्‍यप्रदेश है ।

4.     संस्था के उद्देश्य निम्नांकित होंगे :-

1.      साहित्य, कला, विज्ञान, एवं ललित कलाओं की अभिवृद्धि करना । तथा राष्ट्रीय एकता की भावना पैदा करने के प्रयास करना ।

2.     भारतीय संस्कृति, साहित्य को नाटय कला के माध्यम से श्रेष्ठ बनाते हुए उत्कृष्ठ कार्य करना । एवं कृषि विकास, वृक्षारोपण आदि कार्य ।

3.     नाटय कला साहित्य , विज्ञान , एवं अन्य कलाओं की अभिवृद्धि करते हुये शैक्षिणक शालाओं व सस्थाओं की स्थापना कर राष्ट्र के लिये बालक / बालिकाओं को उत्तम नागरिक बनाना । तथा खेल कूद की गतिविधि व खेलकूद के  कार्यक्रम आयोजित करना। खेल विकास के क्षेत्र में कार्य करना । प्रौढ़ शिक्षा के कार्यक्रम संचालित करना ।

4.     उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति करते हुये रूढि़यों से निकल कर प्रगतिशील विचारों को अपनाते हुए, राष्ट्रीय एकता अखण्डता के लिये धार्मिक सद्भाव एवं सामाजिक उत्थान की योजनाओं का क्रियान्वयन करना ।

5.     सभी जाति वर्ग की शहरी, ग्रामीण, निर्धन, बेसहारा, परित्यक्ता, विधवा, विपत्तिग्रस्त, व कामकाजी महिलाओं के उत्थान एवं उनकें सर्वागींण विकास की योजना संचालित कर , उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगारोन्मुखी बनाकर उन्हें स्थापित करना ।

6.     महिला उत्पीड़न के क्षेत्र में उन्नत कार्य करते हुये पीड़ित महिलाओं की मदद करना। उन्हें कानूनी सहायता व सलाह नि:शुल्क प्रदान । तथा उनके सार्वगीण विकास की योजनाओं को संचालित कर उन्हें लाभान्वित करने के प्रयास करना ।

7.     विकलांग पुरूषों/महिलाओं , बच्चों एवं युवक- युवतियों के कल्याण की योजनाओं व कार्यक्रमों का संचालन करना । उनके शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति के लिये उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से आत्मनिर्भर करना ।

8.            राष्ट्रीय विकास  एवं समाज कल्याण के हित में पुरूषों/महिलाओं एवं युवक/युवतियों तथा शिक्षित बेरोजगार युवक/युवतियों के कल्याण एवं उत्थान की योजनाओं का संचालन कर उन्हें तकनीकी व्यवसायिक एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान कर कार्यक्रमों का संचालन करना ।

4. (अ)   समिति उपरोक्‍त विनियमों द्वारा समिति के कार्यों का प्रबन्‍ध शासक परिषद, संचालकों तथा सभा या शासीय निकायों को सौंपा गया है जिनके नाम पते तथा धन्‍धों का उल्‍लेख निम्‍नांकित है :-

क्रमांक 

नाम   

पता   

पद    

धन्‍धा  

1.     

श्री एम.वाय.कुरैशी

दत्‍तपुरा मुरैना  

अध्‍यक्ष 

शासकीय सेवक 

2.    

श्री फेरन सिंह यादव      

गणेशपुरा मुरैना 

उपाध्‍यक्ष

शासकीय सेवक 

3.    

श्री मोहम्‍मद शकील कुरैशी  

दत्‍तपुरा मुरैना  

सचिव 

एडवोकेट

4.    

श्री मोहम्‍मद शफी कुरैशी  

गणेशपुरा मुरैना 

सह सचिव     

उद्योग  

5.    

श्री मोहम्‍मद अकील कुरैशी  

दत्‍तपुरा मुरैना  

कोषाध्‍यक्ष             

फोटोग्राफर     

6.    

श्री प्रभाकर शर्मा 

दत्‍तपुरा मुरैना  

सदस्‍य 

शासकीय सेवक 

7.    

श्री आफताउद्धीन 

दत्‍तपुरा मुरैना  

सदस्‍य 

छात्र

 

5.           समिति के इस ज्ञापन पत्र के साथ समिति के विनियमों की एक प्रमाणित प्रतिलिपि जैसा कि म.प्र. सोसायटी रजिस्ट्रिकरण अधिनियम 1973 ( 1973 का 44 ) की धारा 5 की उपधारा (1) के अधीन अपेक्षित है संलग्‍न है ।

5.हम अनेक व्‍यक्ति जिनके नाम और पते नीचे लिखे हैं समिति का निर्माण उपरोक्‍त ज्ञापन पत्र के अनुसार करने के इच्‍छुक हैं तथा ज्ञापन पत्र पर निम्‍नांकित साक्षियों की उपस्थिति में हस्‍ताक्षर किये हैं ।

 

क्रमांक 

निर्माणकर्ताओं के नाम      

पते   

हस्‍ताक्षर

1.